अरस्तु की काव्य विषयक मान्यताएँ मुख्य रूप से 'काव्यशास्त्र' में मिलती है. उन्होंने काव्य की रचना, संरचना और प्रभाव-तीनो पक्षों पर विचार किया है, किन्तु जितना विचार उन्होंने त्रासदी की संरचना पर किया, उतना किसी अन्य विषय पर नहीं. पश्चिम में त्रासदी का सर्वप्रथम विवेचन यूनान में हुआ. क्योंकि वहीं उनका सर्वप्रथम सर्वांगीण विकास हुआ.
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